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                   || श्रुति मूर्ती वेद ज्योतिष विद्या पीठ द्वारा ज्योतिष सीखे ||         

 

                                  प्राक शास्त्री  

   १.    ज्योतिष का उद्भव और विकाश :-  ज्योतिष के मुख्य प्रवर्तक, ज्योतिष शास्त्र का वर्गीकरण,

 

                                    सौर मंडल का संक्षिप्त चित्रण,

 

 २. कल विभाजन :- सत्य  ,त्रेता ,द्वापर  युगों का संक्षिप्त वर्णन, भारतीय वर्षमान पद्धति,  प्रभवादी ६०संवत्सर वर्णन               

 

                  अधिक मास , क्षयमास का वर्णन,गोल , अयन ,ऋतुये |

 

 ३. सप्त वार एवं नवग्रह , शुभ एवं क्रूर ग्रह ,मास , पक्ष , तिथियां , तिथि संज्ञा, तिथियों के स्वामी  , राशियाँ ,राशियों के         

 

   स्वामी , उच्च ,नीच ग्रह , स चरण नक्षत्र ज्ञान  , जन्म नक्षत्र एवं पाद ज्ञान , योग वर्णन , करण एवं   भद्रा ज्ञान , होडा         

 

    चक्र , राशी बोध ,

 

 ४. दिशा , विदिशा,दिक्शुल, विदिक्शुल, दिशा शूल परिहार, चंद्रवास और फल , चंद्रवास चक्र , ईस्ट काल साधन , भयात,

 

    भभोग, लग्न एवं  कुंडली ज्ञान, पलभा सारणी   , चरखंड बनाना, लग्न सारणी से लग्न बनाना , लग्न सरणी, नवग्रह 

 

    स्थापना, चन्द्रमा स्पस्ट करना  , जन्मपत्री लिखने की विधि , भाव स्पस्ट  करना , चालित चक्र.आदि का ज्ञान

 

५.  रवि आदि वारो में निषिद्ध तिथि एवं वार, क्रकच, दग्ध दोष,चैत्र आदि मास में शुन्य तिथि , तिथि नक्षत्र सम्बन्ध दोष,

    चैत्र आदि मास में शुन्य राशी , विषम तिथि ,दग्ध लग्न , सभी कार्यो में वर्ज्य योग |